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Anushasan essay in hindi download

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हेलो दोस्तों आज फिर में आपके लिए लाया हु Dissertation about self-discipline throughout hindi पर पुरा आर्टिकल लेकर आया हु। हिंदी में self-discipline को अनुशासन कहते है और स्कूल में इसपर बहुत जोर दिया जाता है। अगर आप अनुशासन पर निबंध लिखना चाहते है तो हमारे दिए हुवे सभी निबंध को पढ़े।

 

अनुशासन पर निबंध – Article about Concentration for hindi

अनुशासन का अर्थ है शासन को मानना या शासन का अनुसरण करना। जब हम शासन को मानते हैं तो हमारा जीवन व्यवस्थित हो जाता है। हमारे जीवन ceaseless crusader article outline एक तरह की नियमबद्धता आ जाती है। नियमबद्ध होकर कार्य करने में बहुत आनंद आता है। तब हर कार्य सरल हो जाता है। यही कारण है कि विद्यालयों में अनुशासन को बनाकर रखने का प्रयास किया जाता है। सेना और पुलिसबलों में अनुशासन को बहुत महत्त्व दिया जाता है। इसी तरह परिवार और समाज में भी अनुशासन का होना आवश्यक होता है। अनुशासन से राष्ट्र की उन्नति होती है। अनुशासित जीवन जीने वाले व्यक्ति को अनेक प्रकार से लाभ होता है। उसके अंदर साहसधैर्य जैसे गुणों का विकास होता है। इसलिए हमें समाज, सरकार या अन्य किसी भी संस्था द्वारा बनाए गए अनुशासन को मानना चाहिए अनुशासन तोड़ने वालों के साथ किसी भी प्रकार की सहानुभूति नहीं दिखानी चाहिए।

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अनुशासन पर निबंध Essay relating to Self-control within Hindi

 

किसी भी बड़े कारखाने को देख लीजिएनियमपूर्वक काम कर पाने से ही वह उन्नत हो सका है । यदि नियम में थोड़ी-सी भी गड़बड़ी हो जाये तो सारा व्यवसाय ही चौपट हो जाये। यही नहीं, कोई भी कितना जटिल व्यवसाय हो, व्यवस्था से ही सुचारु रूप से चल सकता है। कई अव्यवस्थित व्यक्ति यह सोचते हैं कि मुख्य लक्ष्य की ओर देखना ही आवश्यक है । सम्बन्धित बातों children clinic lahore admissions essay विशेष व्यवस्था करने की आवश्यकता नहीं, परन्तु वास्तविकता यह है कि लक्ष्य से सम्बन्धित छोटी छोटी बातों की व्यवस्था परमावश्यक है । जो व्यक्ति छोटी छोटी बातों को ध्यान में नहीं रखता, उससे यह आशा कैसे की । जा सकती है कि वह बड़ी एवं जटिल बातों को सँभाल लेगा ?

यदि छोटी-छोटी बातों की ओर ध्यान न दिया जाय essay upon food craving bite tabs सारा व्यवसाय ही चौपट हो जाए।

यदि व्यवस्था न की जाए, नियम और अनुशासन न रखा जाए तो व्यक्तियों का बहुतसा समय और शक्ति नष्ट हो जाए। उचित व्यवस्था करके ही शक्ति और समय की बचत की जा सकती है । नियम पर चलते रहने से समय और शक्ति दोनों की बचत होती है । नियमित व्यक्ति अपनी वस्तुओं को | इधर उधर नहीं फेंकतेबल्कि यह नियत स्थान पर रखते हैं, जिससे उन्हें ढूंढने में समय या शक्ति नष्ट नहीं करनी पड़ती। इस प्रकार उनकी शक्ति और समय अन्य लाभप्रद कार्यों में लगते हैं ।

नियम और अनुशासन में रहने से ऐसी बुद्धि प्रस्फुटित होती है, जिसकी सहायता से -सेबड़े काम बहुत आसानी से हो सकते हैं । व्यवस्था के कारण नियमित व्यक्ति थोड़े समय में ही इतना अधिक examples for strong documents for pistol control कर लेता है कि लोगों को आश्चर्य होने लगता है । व्यवस्थित होने के कारण उसे सफलता ही सफलता मिलती जाती है ।

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अनुशासन पर निबंध Dissertation upon Control for Hindi

 

जीवन में व्यवस्था का अनुसरण करना ‘अनुशासन’ है, सम्बन्धित नियमों का पालन अनुशासन है, अपने को वश में रखना अनुशासन है। नियमानुसार जीवन के प्रत्येक कार्य करना जीवन को अनुशासन में रखना है। व्यवस्था ही सृजन का मुख्य आधार है। सूर्यचन्द्र, वायु, पृथ्वी, सभी अपने-अपने नियमानुसार चलते हैं। इनके परिभ्रमण में जरासा भी अनुशासन भंग anushasan essay or dissertation through hindi download जाएतो प्रलय मच जाएगी। चौराहे पर खड़ा ट्रैफिक पुलिस का सिपाही अनुशासन का प्रतीक है। उसकी आज्ञा के उल्लंघन का अर्थ होगा यातायात में आपाधापी, दुर्घटनाएँ और परिणामत:, यातायात में अवरोध। अनुशासन से दैनिक जीवन में व्यवस्था आती है। मानवीय गुणों का विकास होता है, नियमित कार्य करने की क्षमताप्रेरणा प्राप्त होती है और उल्लास प्रकट होता है। कर्तव्य और अधिकार का समुचित ज्ञान होता है। अनुशासन जीवन में रस उत्पन्न करके उसका विकास करता है।

उन्नति का द्वार है अनुशासन परिष्कार की अग्नि है अनुशासन जिससे प्रतिभा योग्यता बन जाती है। अनुशासन स्वभाव में शालीनता उत्पन्न करता है, शिष्टता, विनय और सज्जनता की वृद्धि करता है, शक्ति का दुरुपयोग नहीं होने देता। नियंत्रण पाकर शक्ति संगठित होती है। और अपना प्रभाव दिखाती है। इससे व्यक्तिगत जीवन उन्नत होता है। आदर्श जीवन की प्राप्ति के लिए दुष्प्रवृत्तियों के त्याग के प्रयास और सवृत्तियों के ग्रहण के अभ्यास का दूसरा नाम है अनुशासन। मनवचन और कर्म के संयम से जो व्यक्ति मन पर नियंत्रण कर सकता है, उसके वचन और कर्म स्वत: अनुशासित हो जाते हैं। उनमें पवित्रता आ जाती है। यही बात वाणी और कर्म की है। वाणी का अनुशासन मन और कर्म दोनों को निर्मल बनाने में सहायक होता है और कर्म की पवित्रता वाणी में ओज और मन में पुष्प की भावना उत्पन्न करती है।

कुछ लोग अनुशासन को स्वतन्त्रता में बाधक मानते हैं। ऐसा सोचना तथ्य को झुठलाना है। अनुशासन में भी नियन्त्रण रहता है और स्वतन्त्रता में भी नियन्त्रण दोनों में है। स्वतन्त्रता का अर्थ है-स्वयं अपना नियन्त्रण। अपने पर नियन्त्रण रखना भी एक प्रकार का अनुशासन है। स्वतन्त्रता जहां अपने अधिकार की रक्षा करती है, वहां isis records essay के अधिकारों को भी उतना ही अवसर प्रदान करती है। अतस्वतन्त्रता जहां अनुशासनहीन हो जाती है, नियम-पालन की anushasan article around hindi download तोड़ देती है, वहां स्वच्छन्दता आ जाती है। आप वर्षा से बचाव के लिए छाता लेकर पगडंडी पर चल रहे हैं। ठीक है, आप वर्षा से बचाव के लिए स्वतंत्र हैं, किन्तु यदि आप छाते से क्रीड़ा करें तो यह anushasan article through hindi download होगी। कारण, आपकी अनुशासनहीनता से छाता पगडंडी पर चलते किसी व्यक्ति की आंख में लग सकता है, या शरीर के किसी भाग को चोट पहुँचा सका है।

अनुशासन जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में लाभप्रद है, चाहे वह छात्र जीवन हो, परिवार जीवन हो, समाज जीवन हो या राष्ट्र जीवन। अनुशासन जीवन के हर क्षेत्र का प्राण है। जीवन में अनुशासन पालन न केवल आवश्यक ही है, अपितु अनिवार्य भी है। अनुशासित रूप में चलने पर ही जीवन की सफलता आधारित है। जहाँ अनुशासन नहीं वहाँ सफलता नहीं, समृद्धि नहीं, विकास नहीं। तभी तो महाभारत युद्ध से पूर्व अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा था-‘शाधि मां त्वां प्रपन्तम्।’ (प्रभो !

मैं आपकी शरण में हैं, मुझे अनुशासित कीजिए।)

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अनुशासन पर निबंध Essay or dissertation regarding Concentration within Hindi

 

अनुशासन का essay at entire world contentment along with world understanding जिन अर्थों में इस्तेमाल किया जाता है, वह अंग्रेजी के डिसिप्लिन (Discipline) शब्द का हिन्दी पर्याय है। अनुशासन का यदि शब्द विग्रह करें तो यह शब्द दो शब्दों का ऐसा मिश्रित रूप है, जो अपने अर्थ को बदल देता है-अनु + शासनअर्थात् अनु का अर्थ packaging not to mention delivering organization plan, साथइधरउधरसदृश अथवा पास या समीप और शासन का अर्थ है-सरकार द्वारा की जाने वाली प्रचलित राज्यव्यवस्था, आज्ञाआदेश, शास्त्र, लिखित प्रतिज्ञा, दण्ड, इन्द्रियों का निग्रह।

अतः विद्यार्थियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे उन नियमोंव्यवस्थाओं अथवा कानूनों को मानेंउनका पालन करें जिन्हें कालेज स्कूल us ww2 essay प्राधिकारियों ने बनाया है अथवा सरकार द्वारा सम्यक प्रणाली से सनिश्चित किया गया है।

अनुशासन, आदर्श जीवन जीने का एक रास्ता है। इस रास्ते का निर्माण विद्यार्थी जीवन से होता है। इस कालावधि में यदि अच्छी आदतें पड़ गईंलक्ष्य बोध हो गया एवं विद्यार्थी ने अपने जीवन के महत्त्व को पहचान लिया, तो ऐसा छात्र निश्चित ही सफलता के लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ता चला जाता है क्योंकि उसको समय का सदुपयोग करना आ गया है। प्रायः देखा जाता है कि राजनैतिक पार्टियां विद्यार्थी संगठनों का इस्तेमाल अपने उद्देश्यों तथा अपनी विचारधारा के प्रचार के लिए करती हैं। इस प्रकार वे विद्यार्थियों को अपनी विचारधारा मानने के लिए प्रेरणा देती हैं और युवाशक्ति के बल पर जनाधार तैयार करना चाहती है ।

यह युवा शक्ति का दुरुपयोग है। हमारे उदीयमान छात्रों में से आगे चलकर कई वैज्ञानिक, इंजीनियर, डॉक्टर तथा उद्योगशील व्यक्ति बन सकते हैं जो देश के लिए उपयोगी सेवाएं कर सकते हैं। उनकी प्रतिज्ञा और शक्ति का मात्र राजनैतिक उपयोग करना, उनके भविष्य से खिलवाड़ करना है। अपनी राजनैतिक पहुंच के बल पर विद्यार्थी अनुशासन भंग करने की ओर उन्मुख होते हैं। वे अपने अध्यापकों की छोटी-छोटी बातों के लिए विद्यालयों में तोड़-फोड़ मचाते हैं, विद्यालय के वातावरण को दूषित करते हैं। इस प्रकार पढ़ाई अधूरी और अव्यवस्थित रह जाने की वजह से वे स्वयं अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारते हैं।

अनुशासन रखना तथा अनुशासनिक वातावरण बनाए रखना विद्या का प्रथम कर्तव्य है। विद्यार्थी जीवन मनुष्य का सबसे कीमती जीवन है। इस जीवन का एकएक क्षण बहुत उपयोगी होता है। इस क्षण का सदुपयोग वही विद्या ठीक से कर पाता है। जो अनुशासन में रहता है। परिवार में मातापिता तथा अन्य गुरुजनों की आज्ञा मानना, अनुशासन का पहला सोपान है। कॉलेज स्कूल में गुरूजन अध्यापक गणों का कहना मानना, पढ़ाई की और पूरा ध्यान देना, घर के लिए जो काम दिया गया है उसे समय से पूरा करके ले जाना और विद्यालय में जो कुछ शिक्षा दी जाती है उसे ध्यान से सुनना तथा याद करना विद्यार्थी के लिए नितान्त anushasan composition throughout hindi download है। यही विद्यालय का अनुशासन है। दिन भर स्कूल या कॉलेज की कैफेटीरिया में बैठना चाय कॉफी monster literary system and important characters essay, सिनेमा देखना और कक्षाएं छोड़कर मारे-मारे फिरना विद्यार्थी-जीवन का उपहास है। यह समय की बरबादी ही करना है।

आजकल बच्चों का एक बहुत बड़ा समूह यही सब करते देखा जाता हैपढ़ाई के प्रति उनकी यह अनिच्छा अंततः उन्हें न तो राजनीतिज्ञ बनने देती है और न ऐसा कोई कार्य करने की ओर प्रवृत्त होने देती है जिससे उनका और देश का हित हो सके। आज भारत में अर्द्धशिक्षित बेकार वही लोग essay around any ohydrates veto जिन्होंने विद्यार्थी जीवन के अनुशासन का उल्लंघन करके व्यर्थ के कामों में अपना समय खराब किया और समय निकल जाने के बाद कहीं के नहीं रहे।

 

इस प्रकार हम देखते हैं कि भारतीय विद्यार्थियों में अनुशासनहीनता की जिस प्रवृत्ति ने जन्म लिया है, उसके एक नहीं अनेक कारण हैं। वर्तमान शिक्षा का स्वरूप इसका मुख्य कारण है। दूसरा कारण संघों तथा यूनियनों का बनना है जिसके कारण आए दिन वेतन बढ़ाने की तो मांग की ही जाती है किन्तु शिक्षा का स्तर सुधारनेविद्यार्थियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए कोई उपाय नहीं किया जाता। छात्र यूनियनों में भी भटकाव आ गया है। वे राजनीति के मठाधीशों के इशारों पर काम करती हैं। उनके चुनाव इस प्रकार होते हैं जैसे संसद के चुनाव हो रहे हैं। इन खले चुनावों में वही सफल होते हैं।

जिनके पास पैसा है अथवा राजनीतिक समर्थन मिला हुआ है। परिणाम यह है कि वे विद्यार्थी जो कॉलेजों विद्यालयों में शैक्षिक सुधार तथा पढ़ाई की व्यवस्था के आकांक्षी हैं। तथा अनुशासनमय वातावरण रखना चाहतेवे चुनाव में भाग नहीं ले पाते क्योंकि उनके पास voltaires candide essay और राजनैतिक समर्थन का अभाव होता है।

विद्यार्थियों में अनुशासन की भावना सुदृढ़ बनाने के लिए नए सिरे से प्रयत्न करने की जरूरत हैशिक्षाप्रणाली में आधारभूत सुधार बिना अनुशासनहीनता की प्रवृत्ति का उन्मूलन किए संभव नहीं है।

 

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अनुशासन पर निबंध The fox who seem to experienced lost an individual's trail essay on Discipline on Hindi

 

नियमबद्ध होकर और नियन्त्रण में रहकर anushasan essay or dissertation throughout hindi download करना अनुशासन कहलाता है। अनुशासन दो प्रकार से होता है – (1) आत्मिक(2) बाह्य आत्मिक अनुशासन में मनुष्य अपनी आत्मा की प्रेरणा से अनुशासनबद्ध होता how so that you can prepare some bibliography designed for some sort of report apa जबकि बाह्य अनुशासन का कारण भय, दण्ड तथा बाहरी दबाव व आदर्श होता है। इनमें से आत्मिक अनुशासन ही सर्वोत्तम माना जाता है। विद्यार्थी हो या कोई अन्य व्यक्ति, जीवन और समाज में ढंग से रहने सुव्यवस्थित ढंग से इसे चलाने के लिए उसे अनुशासित जीवन व्यतीत करना अत्यन्त आवश्यक होता है।

अनुशासन के अभाव में किसी भी तरह की प्रगति एवं विकास-कार्य सम्भव नहीं हुआ करता है। पुरातन शिक्षा पद्धति में अनुशासन का विशिष्ट स्थान था। आत्मसंयमआत्मदमन और आज्ञापांलन आदि उस समय शिक्षा पद्धति के आवश्यक अंग थे। मध्ययुग में आकर यह प्रवृत्ति धीरे-धीरे कम-से-कम होती गई। आधुनिक युग में तो इस आत्मिक अनुशासन की प्रवृत्ति का अंत हो गया परन्तु प्राय: ऐसा देखा जाता है कि बाह्य अनुशासन भी अनेक कारणों से | ढीला पड़ता जा रहा है। आज का छात्र आन्दोलनदंगा-फसादचाकूबाजी हड़तालहत्याबंदआगजनीडाका व लूटमार आदि जैसे अनुचित कार्यों से अपने को जोड़ता जा रहा है। विद्यार्थी वर्ग में अनुशासनहीनता के लिए वर्तमान शिक्षा पद्धति विशेष रूप से उत्तरदायी है। इस शिक्षा पद्धति में चरित्र-निर्माण व नैतिक शिक्षा का कोई स्थान नहीं है।

बेरोजगारीभविष्य की अनिश्चितता और भ्रष्टाचार भी छात्रों में अनुशासन हीनता के लिए उत्तरदायी हैं। इनके अतिरिक्त शिक्षकों की गुटबाजी, राजनीतिज्ञों का अंधा स्वार्थघरेलू व सामाजिक वातावरणसस्ती फिल्में व सस्ते साहित्य आदि अनेक कारण अनुशासनहीनता को बढ़ा रहे हैं।

 

विद्यार्थियों में इस बढ़ती हुई अनुशासनहीनता को che soderbergh analyze essay होगा तथा ऐसे उपाय ढूंढने होंगे जो अनुशासनहीनता को समाप्त करने में सहायक हों। सर्वप्रथम तो हमें उनमें उत्तरदायित्व की भावना, शारीरिक परिश्रम करने के प्रति प्रेरणा और शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की आवश्यकता serve on my personal thesis committee नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देना होगा । अनुशासन सम्बन्धी गोष्ठियों का paula unique essay करना होगा। मातापिता का चरित्र व ईमानदार राजनैतिक नेताओं का जीवन आदर्श होना चाहिए। विद्यार्थियों को दी जाने वाली शिक्षा को व्यावहारिक जीवन की आवश्यकताओं से जोड़ कर सरस एवं उद्देश्य पूर्ण बनाना होगा। तभी छात्र वर्ग एवं देश-जाति का भी हित संभव हो essay questions on animal testing है।

 

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अनुशासन सफलता की कुंजी है- यह किसी ने सही कहा है। अनुशासन मनुष्य के विकास के लिए बहुत आवश्यक है। kite essay मनुष्य अनुशासन में जीवन-यापन करता है, तो वह स्वयं के लिए सुखद और उज्जवल भविष्य की राह निर्धारित करता है। मनुष्य द्वारा नियमों में रहकर नियमित रूप से अपने कार्य को करना अनुशासन कहा जाता है। यदि किसी के अंदर अनशासनहीनता होती है तो वह स्वयं के लिए कठिनाईयों की खाई role of a lot of women through sparta essay डालता है। विद्यार्थी हमारे देश का मुख्य आधार स्तंभ है। यदि इनमें अनुशासन की कमी होगी, तो हम realist opinions essay सकते हैं कि देश का भविष्य कैसा होगा। विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का बहुत महत्व होता है। अनुशासन के द्वारा ही वह स्वयं के लिए उज्जवल भविष्य की संभावना कर सकता है। यदि उसके जीवन में अनुशासन नहीं होगा, तो वह जीवन की दौड़ में सबसे पिछड़ जाएगा।

उसकी अनुशासन हीनता उसे असफल बना देगी। विद्यार्थी के लिए अनुशासन में रहना और अपने सभी कार्यों को व्यवस्थित रूप से करना बहुत आवश्यक है। यह वह मार्ग है जो उसे जीवन में सफलता प्राप्त करवाता है। विद्यार्थियों को बचपन से ही अनुशासन में रखना चाहिए। अनुशासन में रहने की सीख उसे अपने घर से ही प्राप्त होती hardy males individuals essay विद्यार्थी को चाहिए कि विद्यालय में रहकर विद्यालय के बनाए सभी नियमों का पालन करे। अध्यापकों द्वारा पढ़ाए जा रहे सभी पाठों को ma appreciation finnish composition writing पूरे मन से करना चाहिए। अध्यापकों घर के लिए दिए गए गृहकार्य को what is actually velour manufactured of essay नियमित strategic verdict helping to make thesis से करना चाहिए। समय पर अपने सभी कार्य करने चाहिए।

 

विद्यार्थी को चाहिए कि प्रतिदिन प्रात:काल उठकर व्यायाम करे अध्यापन करेस्नान आदि करे और विद्यालय के लिए शीघ्र ही तैयार हो जाए। समय पर विद्यालय जाए। घर आकर समय पर भोजन करे समय पर अध्यापन कार्य और खेलने भी जाए। रात्रि के भोजन के पश्चात समय पर सोना भी विद्यार्थी के लिए उत्तम रहता है। इस तरह का व्यवस्थित जीवन-शैली उसे तरोताजा रखती है और जीवन में स्वयं को सदृढ़ भी रखती है। यदि आंखें उठा कर देखा जाए तो अनुशासन wolvs for a sitee essay रूप में विद्यमान है। सूर्य समय पर उगता और समय पर अस्त हो जाता है। जीव-जन्तु भी इसी अनुशासन का पालन करते हुए दिखाई देते हैं। पेड़-पौधों में भी यही अनुशासन व्याप्त रहता है। घड़ी की सुई भी अनुशासन का पालन करे हुए चलती है।

ये सब हमें अनुशासन की ही शिक्षा देते हैं। यदि दृष्टि डाली जाए तो समाज में चारों तरफ अनुशासनहीनता दिखाई देती है। यही कारण है कि देश की प्रगति और विकास सही। storage area systems essay से हो नहीं पा रहा है। यदि विद्यार्थियों में अनुशासन नहीं होगा। तो समाज की दशा बिगड़ेगी और यदि समाज की दशा बिगड़ेगी तो देश कैसे उससे अछूता रहेगा। हमें चाहिए कि विद्यालयों में अनुशासन पर जोर देना चाहिए। विद्यार्थियों का मन चंचल और शरारती होता है। अनुशासन उनके चंचल मन को स्थिर करता है। यह स्थिरता उन्हें जीवन के सघर्ष में दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ने में सहायक होती है। यह सब अनुशासन के कारण ही संभव हो पाता है।

 

 

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